डॉ. मोहन यादव
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प्रारंभिक जीवन एवं पृष्ठभूमि
डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में, श्री पूनमचंद यादव एवं श्रीमती लीलाबाई यादव के परिवार में हुआ। भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भूमि में पले-बढ़े डॉ. यादव ने बचपन से ही अनुशासन, सेवा और समर्पण जैसे मूल्यों को आत्मसात किया।
शिक्षा के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता उनके शैक्षणिक सफर में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने विज्ञान स्नातक (बी.एससी.), विधि स्नातक (एल.एल.बी.), राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.), प्रबंधन में स्नातकोत्तर (एम.बी.ए.) तथा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
मध्य प्रदेश की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से गहराई से जुड़े डॉ. यादव के प्रारंभिक अनुभवों ने समावेशी विकास, सशक्त शिक्षा व्यवस्था और जमीनी स्तर पर जन-सशक्तिकरण की उनकी दृष्टि को आकार दिया।
नेतृत्व की सार्वजनिक यात्रा
मोहन यादव के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उनके छात्र जीवन से हुई। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने एक सक्रिय, कर्मठ और प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। वे माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन के छात्र संघ में पहले उप-सचिव तथा बाद में अध्यक्ष रहे।
इसके पश्चात उनका सक्रिय जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुआ। इस संगठन में कार्य करते हुए उनके नेतृत्व, संगठन और जनसेवा से जुड़े गुणों का निरंतर विकास हुआ तथा आगे चलकर वे परिषद में राष्ट्रीय मंत्री के दायित्व तक पहुँचे।
उनकी कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें वर्ष 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
वर्ष 2013 में वे उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके पश्चात 2018 तथा 2023 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार विजय प्राप्त कर जनता का विश्वास बनाए रखा।
वर्ष 2020 से 2023 तक उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। इस अवधि में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में रामचरितमानस जैसे महान ग्रंथ को सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया।
13 दिसंबर 2023 को उन्होंने मध्य प्रदेश के उन्नीसवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
मुख्यमंत्री के दायित्व के साथ-साथ वे गृह, सामान्य प्रशासन, जनसंपर्क, जेल, खनिज, नागरिक उड्डयन, औद्योगिक नीति तथा निवेश प्रोत्साहन विभागों का भी प्रभार संभाल रहे हैं।
उनका कार्यदर्शन पारदर्शी शासन व्यवस्था, युवाओं के सशक्तिकरण, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तथा प्रदेश के आर्थिक विकास पर केंद्रित है। वे एक ऐसे मध्य प्रदेश की कल्पना करते हैं जो समृद्ध, आत्मनिर्भर और अपनी गौरवशाली परंपरा पर गर्व करने वाला हो।